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letra de jo main janti bichrat hain sayyan - amir khusrau

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जो मैं जानती बिछड़त हैं सैयां
घुंघटिया में आग लगा लेती
ऐ काश मैं उन पे मिट जाती
ऐ काश मैं उन को मना लेती

मोहे भाग जगे तोरे दर्शन से
तोरे प्रेम में दुलहन बन बैठी
जो मैं जानती बिरहा आवेगा
इस रूप पे खाक लगा लेती

काहे नैन चुरावत प्रेम पिया
काहे चिलमन पार है जा बैठे
काहे दिल तड़पावत है सैयां
बिन दर्शन चैना आ ना सके

सुनो प्रेम नगर की प्रेम कथा
इक मैं और इक सैयां तनहा
अखियों अखियों ने बात कही
और मैं तन मनवा हार गई

मोरी बइयो में खनके कंगन है
और पैरों में पायल छन छन है
इक आस के मोती अखियन में
और दिल में सुहाग बसा बैठी

मोहे सखिया सतावे शाम सहर
तोरी याद दिलावे चार पहर
बनी दुलहनिया से जोगनिया
बिरहन जो होश गवा बैठी
काहे चिलमन ओट से देखत है
खामोश ना हो कोई शब्द कहीं
कुछ आप भी दिल की बात कहे
कुछ मैं दुख अपना सुना लेती

कभी उनको देख के जीवत थी
अब जीवत हूँ तोरे दर्शन को
काश मैं उनको भा जाती
फिर साथ भी उनके विदा होती

हाशिर अब जीवन क्या कहिए
एक टूटी सी हसरत है बाकी
इस पार से कब उस पार चले
घूंघट बारात सजा बैठी

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